हरयाणवी जाट

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Wednesday, 20 May 2015

एक बै भाई, गाम में एक आदमी मर-ग्या। उसके घर वाले उसनै अंतिम संस्कार तैं पहल्यां न्हुआवण (नहलाने) लाग-गे - उस (मुर्दे) नै कुर्सी पै बैठा कै । घणी हाण (देर) हो-गी न्हुवाते-न्हुवा ते - सारे कत्ती दुखी हो-गे। वो (मुर्दा) कदे इस साइड में पड़-ज्या, अर कदे दूसरी साइड में पड़-ज्या ! एक भाई कत्ती दुखी हो-ग्या अर छो में आ कै बोल्या -ऐ मेरे यार, मरैं तै सब सैं, पर तू तै कत्ती-ए जी तोड़ रहया सै !!
;D

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